Description
संवाद शुरू हुआ। क्रम बढ़ा। कब उपन्यास का प्रारूप बन गया, पता ही न चला। पात्र अपनी धुन में, लेखक अपनी धुन में। उपन्यास बन जाएगा, सोचा भी न था। कोमल मन की परिपक्व भावनाएं उमड़ती-घुमड़ती व्यक्त -अव्यक्त स्वरूप ग्रहण करने लगीं। दोनों में किसी ने ‘आइ लव यू’ नहीं कहा, पर कहा बहुत कुछ।
उपन्यासकार के वक्तव्य का अंश
पूर्णतः संवाद-शैली में लिखे गए मैथिली उपन्यास का हिंदी अनुवाद – मिलती हूं थोड़ी देर बाद।
लेखक व अनुवादक : प्रदीप बिहारी


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