Description
एहि उपन्यासक एक टा पात्र बजैत छैक-
“जं कोनो नीक लेखक के पढ़बाक हो तं हुनकर मूल भाषा मे पढ़क चाही, ई हमर नियम अछि। अनुवाद मे आनन्द नहि अबैत अछि।”
एहि उपन्यासक एक टा पाठक लिखैत छथि-
“उपन्यास भाया रावलपिंडी कथन कें प्रदीप बिहारी द्वारा कयल मैथिली अनुवाद एकदमे फूसि साबित करैत छैक। जेहने शानदार ई उपन्यास छैक ओहने सुन्दर एकर अनुवाद भेल छैक। पूरा पढ़लाक बाद जेना दिमाग मे ई कथा चलैत रहल। धन्यवाद अहांकें जे एकरा हमरा सभ लेल उपलब्ध करयलहुं।”


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