Description
प्रसिद्ध लेखक आ फिल्मकार अविनाश दास लिखैत छथि-
सिमरिया मात्र एक टा घाट नहि अछि। ओ स्मृति अछि, आस्था अछि, भय अछि, आ ओ चुप्पी सेहो- जाहि भीतर समाज अपन प्रश्न सभ छोड़ि दैत अछि। प्रदीप बिहारी जीक एहि संग्रहक कथा सभ गंगाक कात घटैत घटना सभक साधारण बयान नहि अछि। ई ओ दुनिया खोलैत अछि, जतय धर्म कखनो जीवनक आधार बनैत अछि, तं कखनो ओकर बोझ। एहिठाम पवित्रता आ हिंसा, करुणा आ क्रूरता, विश्वास आ विवशता- सभ एक्के संग सांस लैत देखाइत अछि। एहि कथा सभक पात्र कोनो असाधारण लोक नहि, ओ हमरे सभ जकां अछि- देखैत अछि, बुझैत अछि, डेराइत अछि आ बहुत बेर मौन सेहो रहि जाइत अछि। इएह मौन अइ संग्रहक कथा सभक सभसं तेज स्वर बनि जाइत अछि। मैथिलीक सहज, सघन आ लोक-संवेदनशील भाषा मे लिखल ई कथा सभ सिमरिया घाट के एकटा सांस्कृतिक भूगोल मे बदलि दैत अछि, जतय प्रत्येक कथा जीवन आ मृत्यु केर बीच ठाढ़ भ’ क’ प्रश्न करैत अछि – एहन प्रश्न, जाहि सं बचब आसान नहि। सिमरिया मात्र कथा-संग्रह नहि, एकटा अनुभव अछि – जे पाठक के घाट सं लौटलाक बादो ओकर संग चलैत रहैत अछि।


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